बालाघाट/छिंदवाड़ा/भोपाल। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में लोक निर्माण विभाग (PWD) की पीआईयू शाखा में पदस्थ कार्यपालन यंत्री के खिलाफ आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने गुरुवार सुबह बड़ी कार्रवाई की। आय से अधिक संपत्ति और पद के दुरुपयोग से जुड़े आरोपों की जांच के तहत EOW की तीन टीमों ने बालाघाट, छिंदवाड़ा और भोपाल स्थित ठिकानों पर एक साथ दबिश दी।
बताया गया है कि कार्रवाई गुरुवार सुबह करीब 6 बजे शुरू हुई। डीएसपी मंजीत सिंह के नेतृत्व में बालाघाट स्थित शासकीय आवास पर पहुंची टीम ने दस्तावेजों और अन्य सामान की जांच शुरू की। शुरुआती कार्रवाई में करीब ढाई लाख रुपये नकद और लगभग 25 लाख रुपये कीमत का एक लग्जरी वाहन मिलने की जानकारी सामने आई है।
EOW की टीम कार्यपालन यंत्री को साथ लेकर आगे की जांच और दस्तावेजों की पड़ताल के लिए छिंदवाड़ा रवाना हुई। इसके अलावा भोपाल स्थित आवास पर भी जांच जारी रही।
14 महीने से बालाघाट में पदस्थ
जानकारी के अनुसार संबंधित कार्यपालन यंत्री करीब 14 महीने से बालाघाट में पदस्थ हैं। इस दौरान उन पर विभिन्न निर्माण और विकास कार्यों के बिलों के भुगतान के एवज में ठेकेदारों से कथित तौर पर कमीशन मांगने के आरोप लगाए जाते रहे हैं।
इन्हीं आरोपों को लेकर सिविल कांट्रेक्टर एसोसिएशन की ओर से पहले स्थानीय प्रशासन और विभागीय अधिकारियों के समक्ष शिकायतें की गई थीं। कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी युनुस पप्पा खान ने 13 जुलाई को EOW में शिकायत दर्ज कराई थी।
30 लाख के भुगतान के बदले 10 लाख कमीशन का आरोप
शिकायतकर्ता ने EOW को दिए आवेदन में कार्यपालन यंत्री पर ठेकेदारों को परेशान करने और भुगतान के लिए कथित रूप से कमीशन मांगने के आरोप लगाए हैं। शिकायत में एक ठेकेदार छोटुलाल ठाकरे के करीब 30 लाख रुपये के सरकारी भुगतान को पास करने के बदले कथित तौर पर 10 लाख रुपये कमीशन लेने का आरोप भी लगाया गया है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मामले को लेकर उन्होंने कई बार प्रशासन और विभागीय स्तर पर शिकायतें कीं, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर EOW से शिकायत की गई।
जांच पूरी होने के बाद स्थिति होगी स्पष्ट
EOW की कार्रवाई फिलहाल जांच के स्तर पर है। अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों, संपत्तियों, बैंक खातों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविक पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।
छापेमारी के दौरान बरामद सामग्री और दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
