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जबलपुर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, OPD ठप; मरीजों की बढ़ी मुश्किल

जबलपुर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, OPD ठप; मरीजों की बढ़ी मुश्किल

₹14,300 से बढ़ाकर ₹30 हजार मानदेय की मांग, भोपाल में पुलिस कार्रवाई का विरोध; गुरुवार से इमरजेंसी सेवाएं भी बंद करने की चेतावनी

जबलपुर।

भोपाल में आंदोलनरत जूनियर डॉक्टरों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध और मासिक मानदेय में बढ़ोतरी की मांग को लेकर नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज, जबलपुर के रेजीडेंट डॉक्टरों ने बुधवार सुबह से अनिश्चितकालीन कामबंद हड़ताल शुरू कर दी।

डॉक्टरों ने OPD का पूर्ण बहिष्कार किया, महाकौशल और विंध्य अंचल से इलाज कराने पहुंचे मरीजों की परेशानी बढ़ी।

हड़ताल के चलते अस्पताल की ओपीडी व्यवस्था प्रभावित हुई। दूर-दराज से इलाज की उम्मीद लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे सामान्य और गंभीर मरीजों तथा उनके परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।

₹14,300 नहीं, कम से कम ₹30 हजार मानदेय की मांग

आंदोलनकारी डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें वर्तमान में ₹14,300 प्रतिमाह मानदेय मिलता है। डॉक्टर इसे बढ़ाकर न्यूनतम ₹30,000 प्रतिमाह किए जाने की मांग कर रहे हैं।

वर्तमान मानदेय
₹14,300
प्रतिमाह
डॉक्टरों की मांग
₹30,000
न्यूनतम प्रतिमाह

भोपाल में पुलिस कार्रवाई को लेकर आक्रोश

हड़ताल की दूसरी प्रमुख वजह भोपाल में प्रदर्शन कर रहे चिकित्सकों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई है। जबलपुर में आंदोलनरत डॉक्टरों ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए नाराजगी जाहिर की है।

डॉक्टरों का कहना है कि उनकी मांगों पर संवाद और समाधान के बजाय पुलिस कार्रवाई स्वीकार्य नहीं है।

सुरक्षा और प्रशासनिक उपेक्षा का भी मुद्दा

आंदोलनरत डॉक्टरों ने कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी के दौरान सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था और लंबे समय से लंबित मांगों के समाधान का मुद्दा भी उठाया है।

डॉक्टरों का आरोप है कि लंबे समय से समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किए जाने के बावजूद अपेक्षित समाधान नहीं निकला, जिसके चलते अब उन्हें कामबंद आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

हड़ताल के बीच मरीजों की बढ़ी मुश्किल

नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज पर जबलपुर ही नहीं, बल्कि महाकौशल और विंध्य क्षेत्र के कई जिलों के मरीज इलाज के लिए निर्भर रहते हैं। ऐसे में डॉक्टरों के कामबंद आंदोलन का असर मरीजों पर दिखाई देने लगा है।

दूर-दराज से इलाज के लिए पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों को ओपीडी सेवाएं प्रभावित होने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

गुरुवार से इमरजेंसी सेवाएं भी बंद करने की चेतावनी

कैजुअल्टी • ट्रॉमा • ICU

आंदोलनकारी डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि शासन स्तर पर उनकी मांगों को लेकर जल्द सकारात्मक चर्चा नहीं हुई तो गुरुवार से इमरजेंसी सेवाओं का भी बहिष्कार किया जा सकता है।

सीनियर डॉक्टरों के भरोसे व्यवस्था संभालने की कोशिश

स्थिति से निपटने के लिए अस्पताल प्रबंधन सीनियर कंसलटेंट्स और प्राध्यापकों की ड्यूटी लगाकर वैकल्पिक व्यवस्था बनाने में जुटा है। हालांकि मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण उपलब्ध व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ रहा है।

आंदोलन के तीन प्रमुख मुद्दे

1. मासिक मानदेय ₹14,300 से बढ़ाकर न्यूनतम ₹30 हजार किया जाए।
2. भोपाल में आंदोलनरत डॉक्टरों पर पुलिस कार्रवाई का विरोध।
3. ड्यूटी के दौरान सुरक्षा और लंबित मांगों पर ठोस निर्णय।

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