मनमानी फीस का विरोध करने पर जाॅय स्कूल संचालक ने दी जान से मारने की धमकी - Khabri Guru

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मनमानी फीस का विरोध करने पर जाॅय स्कूल संचालक ने दी जान से मारने की धमकी




जबलपुर। शासन-प्रशासन ने एक तरफ तो कोरोनाकाल से परेशान नागरिकों को राहत देने के मकसद से अनेक निर्देश देते हुए सुविधाएं देने का रास्ता बनाया वहीं दूसरी ओर यदि प्रशासन द्वारा निर्धारित शिकायत केन्द्र में यदि कोई अपनी बात कहता है तो उसकी जान पर बन आती है। ऐसा ही एक मामला जबलपुर में सामने आया है। जिसमें शिकायतकर्ता को एक स्कूल संचालक ने दबंगई दिखाते हुए अपने कार्यालय बुलाकर धमकियां दे डालीं।

मध्यप्रदेश में पिछले 1 साल से कोरोना संक्रमण की वजह से निजी स्कूलों को बंद रखा गया। वही निजी स्कूलों को बंद रखने के बावजूद फीस वसूली को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। अब ऐसा ही एक मामला जबलपुर का सामने आया है। जहां एक स्कूल संचालक ने अभिभावकों को स्कूल बुलाकर जान से मारने की धमकी दे दी। बताया गया है कि जबलपुर के नामचीन जाॅय सीनियर सेकेंडरी स्कूल के संचालक अखिलेश मेबन द्वारा एक अभिभावक को बंद कमरे में बुलाकर जान से मारने की धमकी दी गई है। इतना ही नहीं अखिलेश मेबन द्वारा अभिभावक को गाली गलौज देने का मामला भी सामने आया है। इस मामले में अभिभावक द्वारा पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। जहां कहा गया कि स्कूल संचालक द्वारा उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई है। जिसपर पुलिस ने अन्य धाराओं में स्कूल संचालक पर मामला दर्ज किया है। मामले में पेशे से पत्रकार अभिभावक सत्यम तिवारी का कहना है कि स्कूल संचालक द्वारा जबरन दबाव बनाकर मनमानी फीस की वसूली की जा रही थी। इस मामले में जब उन्होंने प्रशासन से शिकायत करते हुए विरोध किया तो उन्हें स्कूल में बुलाया गया। जहां एक कमरे में बंद कर गनमैन को अभिभावक को जान से मारने के निर्देश स्कूल संचालक द्वारा दिए गए। इस मामले में पुलिस ने स्कूल संचालक अखिलेश मेबन के खिलाफ शिकायत दर्ज कर आरोपी की गिरफ्तारी के प्रयास शुरू कर दिए हैं।

रहते हैं विवादों में

बताया गया है कि जाॅय स्कूल संचालक अखिलेश मेबन अपनी कार्यप्रणाली को लेकर हमेशा ही विवादों में बने रहते हैं। पिछले दिनों एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें आनलाइन क्लास के दौरान मेबन सिगरेट पीते हुए नजर आए थे। इस दौरान बच्चे भी आनलाइन थे। वीडियो सामने आते ही इसका खासा विरोध हुआ था। खास बात यह रही जिला प्रशासन को इस बात की जानकारी होने के बाद भी किसी आला अधिकारी ने मामले को संज्ञान में नहीं लिया और न किसी प्रकार की कार्रवाई की गई। इसके पीछे प्रशासनिक अधिकारियों व राजनेताओं से उनकी नजदीकियों को ही कारण बताया जा रहा है।



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