
भोपाल। मध्यप्रदेश में लम्बे समय तक भाजपा संगठन की बागडोर सम्हालने वाले अरविंद मेनन ने आखिरकार गृहस्थ जीवन को श्रेष्ठ मानते हुए परिणय सूत्र में बंधने का फैसला कर लिया है। उनका विवाह इसी माह की 20 तारीख को सम्पन्न होगा। विगत दिवस उनकी सगाई की रस्म केरल में पारिवारिक सदस्यों के बीच सम्पन्न हुई।
मध्यप्रदेश भाजपा के पूर्व संगठन मंत्री अरविंद मेनन की सगाई की खबर ने सामने आई है। जानकारी के अनुसार भाजपा के राष्ट्रीय सचिव तथा पश्चिम बंगाल के प्रभारी का दायित्व संभाल रहे अरविंद मेनन जल्दी ही विवाह के बंधन में बंधने वाले हैं। उन्होंने इसी शुक्रवार को केरल में परिवार और रिश्तेदारों की मौजूदगी में सगाई की रस्म पूरी कर ली है। जानकारों के अनुसार 20 अगस्त को शादी की तारीख तय की गई है।
श्री मेनन की पृष्ठभूमि मूलतः आरएसएस से जुड़ी है। उन्होंने मप्र मेकरीब डेढ़ दशक तक भाजपा से जुड़कर संगठन को अपनी सेवाएँ दी हैं। उनको प्रदेश संगठन महामंत्री पद से साल 2016 में दायित्वमुक्त किया गया था। मेनन इस दौरान शिवराज सिंह चौहान के काफी करीब हो गए थे।
मेनन केरल के रहने वाले हैं, लेकिन उनकी परवरिश वाराणसी में हुई। वे साल 2002-03 में इंदौर में बतौर संगठन में पदाधिकारी बने। विभाग से लेकर इंदौर के संभागीय संगठन मंत्री भी बने। इसके बाद 2006 में उन्हें महाकौशल प्रांत का सह संगठन मंत्री बनाया गया। चार साल बाद 2010-11 में माखन सिंह को हटाकर मेनन को मप्र संगठन की कमान दे दी गई। मेनन ने करीब 13 साल संगठन का काम किया। कार्यकाल के उत्तरार्द्ध में मेनन और उनके कुछ करीबियों पर आरोप भी लगे, जिन्हें पार्टी हाईकमान ने गंभीरता से लेते हुए दायित्वमुक्त कतरे हुए कुछ अनुषांगिक संगठनों की जिम्मेदारी देकर मप्र से अलग कर दिया था। बाद में उन्हें पश्चिम बंगाल के प्रभारी के तौर पर भेज दिया गया था।
मेनन केरल के रहने वाले हैं, लेकिन उनकी परवरिश वाराणसी में हुई। वे साल 2002-03 में इंदौर में बतौर संगठन में पदाधिकारी बने। विभाग से लेकर इंदौर के संभागीय संगठन मंत्री भी बने। इसके बाद 2006 में उन्हें महाकौशल प्रांत का सह संगठन मंत्री बनाया गया। चार साल बाद 2010-11 में माखन सिंह को हटाकर मेनन को मप्र संगठन की कमान दे दी गई। मेनन ने करीब 13 साल संगठन का काम किया। कार्यकाल के उत्तरार्द्ध में मेनन और उनके कुछ करीबियों पर आरोप भी लगे, जिन्हें पार्टी हाईकमान ने गंभीरता से लेते हुए दायित्वमुक्त कतरे हुए कुछ अनुषांगिक संगठनों की जिम्मेदारी देकर मप्र से अलग कर दिया था। बाद में उन्हें पश्चिम बंगाल के प्रभारी के तौर पर भेज दिया गया था।