नई दिल्ली। अफगानिस्तान की एक महिला सांसद अपनी मां का इलाज कराने गुड़गांव आई थीं। उन्हें नहीं पता था कि इस बीच उनके मुल्क की सूरत यूं बदल जाएगी। अब उनके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे।
उनके फोन में रोज सैकड़ों मेसेज आते हैं, मगर सोमवार की दोपहर जो मेसेज आया, उसने मोहतरमा को जड़ सा कर दिया। पैरों के नीचे से जमीन दरकती हुई सी मालूम पड़ने लगी। मेसेज काबुल से था, उनके भाई का। 'तालिबान यहां आ चुके हैं। वे पड़ोस में हैं।' बस इतना सा मेसेज था। होटल के रिसेप्शन पर चेकआउट करने के बाद, उनके आंसू छलक आए। उन्होंने पलटकर मेसेज किया, 'कहां?' मोहतरमा अफगानिस्तान में सांसद हैं। गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में अपनी मां के ब्लड क्लॉट का इलाज कराने दो हफ्ते पहले भारत आई हैं। उन्होंने कभी बुरे से बुरे सपने में भी नहीं सोचा था कि ऐसा दिन इतनी जल्दी आ जाएगा।
काबुल ढह चुका है, उनकी सरकार जा चुकी है, राष्ट्रपति देश छोड़कर भाग चुके हैं। महिला सांसद के परिवार में उनकी महीने की बेटी है। मन में बेटे का भी खयाल आता है जो 19 साल का है। वो कहती हैं, "पिछले दो दिन से लगातार रोए जा रही हूं। हर पल बड़ी मुश्किल से बीता है।" 39 साल की यह महिला उत्तर-पूर्वी अफगानिस्तान के एक राज्य का प्रतिनिधित्व करती है।
लाजपत नगर में बाकी अफगान सांसदों संग रहेंगी अब
होटल से चेकआउट कर दिल्ली के लाजपत नगर निकलते हुए उन्होंने कहा, 'मैं नहीं जानती कि यहां कितने दिन रहना पड़ेगा। मेरा परिवार खतरे में है। मैं वहां के अधिकारियों से लगातार संपर्क में थी मगर उन्होंने मुझे नहीं बताया कि ऐसा कुछ होने वाला है। मैं भारत सरकार और संयुक्त राष्ट्र से संपर्क की कोशिश करूंगी। अन्य (अफगान) सांसद भी आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि वे अपनी मां और छोटी बहन के साथ वहीं रहेंगी। कम से कम वे ऐसे लोगों के बीच में तो होंगी जिन्हें वे जानती हैं। सांसद को यह भी अंदाजा नहीं है कि उनके बैंक अकाउंट्स काम करेंगे भी या नहीं।
महिला सांसद ने कहा, "लोग मुझे बिना रुके फोन किए जा रहे हैं। कुछ मेरे प्रचार करने वाले हैं, साथी हैं जो मदद मांग रहे हैं और कुछ मुझे सलाह दे रहे हैं कि वापस ना लौटूं। मुझे मेरे पड़ोसी का फोन आया जिसने कहा कि लौटना मत।" उन्होंने कहा कि मुल्क में कई जिंदगियां खतरे में हैं और पिछले दो महीनों में उन्हीं के राज्य में कई हत्याएं हुई हैं।
29 साल की उनकी बहन एक गायनकोलॉजिस्ट है। उसने कहा कि कई ग्रुप्स पर एक क्लिप वायरल हो रही है जिसमें तालिबान डॉक्टर्स से पीछे हटने और बिना सैलरी के काम करने को कह रहा है। उसने कहा, "मैं नहीं जानती आगे क्या होगा। हमारे परिवार वहां हैं और उनकी जान खतरे में है। यहां हमारे पास ज्यादा संसाधन भी नहीं हैं।"
काबुल ढह चुका है, उनकी सरकार जा चुकी है, राष्ट्रपति देश छोड़कर भाग चुके हैं। महिला सांसद के परिवार में उनकी महीने की बेटी है। मन में बेटे का भी खयाल आता है जो 19 साल का है। वो कहती हैं, "पिछले दो दिन से लगातार रोए जा रही हूं। हर पल बड़ी मुश्किल से बीता है।" 39 साल की यह महिला उत्तर-पूर्वी अफगानिस्तान के एक राज्य का प्रतिनिधित्व करती है।
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होटल से चेकआउट कर दिल्ली के लाजपत नगर निकलते हुए उन्होंने कहा, 'मैं नहीं जानती कि यहां कितने दिन रहना पड़ेगा। मेरा परिवार खतरे में है। मैं वहां के अधिकारियों से लगातार संपर्क में थी मगर उन्होंने मुझे नहीं बताया कि ऐसा कुछ होने वाला है। मैं भारत सरकार और संयुक्त राष्ट्र से संपर्क की कोशिश करूंगी। अन्य (अफगान) सांसद भी आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि वे अपनी मां और छोटी बहन के साथ वहीं रहेंगी। कम से कम वे ऐसे लोगों के बीच में तो होंगी जिन्हें वे जानती हैं। सांसद को यह भी अंदाजा नहीं है कि उनके बैंक अकाउंट्स काम करेंगे भी या नहीं।
महिला सांसद ने कहा, "लोग मुझे बिना रुके फोन किए जा रहे हैं। कुछ मेरे प्रचार करने वाले हैं, साथी हैं जो मदद मांग रहे हैं और कुछ मुझे सलाह दे रहे हैं कि वापस ना लौटूं। मुझे मेरे पड़ोसी का फोन आया जिसने कहा कि लौटना मत।" उन्होंने कहा कि मुल्क में कई जिंदगियां खतरे में हैं और पिछले दो महीनों में उन्हीं के राज्य में कई हत्याएं हुई हैं।
29 साल की उनकी बहन एक गायनकोलॉजिस्ट है। उसने कहा कि कई ग्रुप्स पर एक क्लिप वायरल हो रही है जिसमें तालिबान डॉक्टर्स से पीछे हटने और बिना सैलरी के काम करने को कह रहा है। उसने कहा, "मैं नहीं जानती आगे क्या होगा। हमारे परिवार वहां हैं और उनकी जान खतरे में है। यहां हमारे पास ज्यादा संसाधन भी नहीं हैं।"
