जबलपुर। दयोदय परिसर तिलवाराघाट में गुरुवार को आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने कहा कि यह मनुष्य गति है, एक मनुष्य की आकृति दूसरे की आकृति से मिलती भी नहीं है। जब शरीर में यह भिन्नता है तो भावों की भिन्नता होगी ही। इन भावों की उत्पत्ति में कर्म प्रधानता अवश्य रहती है। तीर्थंकर भगवान में असंख्य प्रकार के तीर्थंकरों की प्रकृति का बंध होता है। जब उनको योगनिद्रा करना होता है, ऋषभ भगवान को लगभग 1 महीने लगे योग निद्रा करने में। योगिनी ग्रह एक अंतर मुहूर्त का काम है किंतु उनको एक महीने पहले ही उस कार्य को करने चैदहवें गुडिस्थान आ गया। तीर्थंकर का वैभव अपने आप में देखने लायक था। भगवान महावीर को इस काल में अंत समय लगा, लेकिन भगवान ऋषभदेव को ज्यादा समय लगा।
आचार्यश्री ने बताया कि लोग कहते हैं, वह बड़े हैं इसलिए ऐसा हुआ। ऐसा भी कहा जाता है उनकी 500 धनुष बराबर काया थी। कोई कहेगा इतनी बड़ी काया थी इसलिए समय लगा। उनकी कर्मों की गिनती ज्यादा होगी, इसलिए उसे समाप्त करने में 1 महीने का समय लग सकता है। दूसरे ने यह सोचा कि इनके कर्म ऐसे होंगे जिनकी संख्या बहुत अधिक होगी इसलिए समय ज्यादा लगा। दोषों के लिए भी यही समझा जा सकता है। जब सब लोग के लिए अंतर मुहूर्त का ही समय रखा है, तब निद्रा काल हुआ। हमारे व्यवहारिक जीवन में बहुत से कार्य हो नहीं पाते। लोग समझते हैं कि घड़ी से समय को पकड़ा जा सकता है लेकिन काल को कोई नहीं पकड़ सकता। जिसने काल को पकड़ लिया वह मृत्युंजय हो गया।
उन्होंने कहा कि जो समय के सार को पकड़ लेता है वह बाकी सब जीत सकता है। लोग घड़ी को बांधकर घूमते हैं। वह समझते हैं समय, काल को पकड़ लिया। जो सच्चे श्रवण होते हैं वे समयसार को जानने वाले होते हैं। वे प्रार्थना करते रहते हैं कि भगवान किसी को भी हम पकड़ नहीं सकते किंतु अंतरात्मा से हमारे कर्म के उदय से पकड़ में आ गया है। अब इसका निस्तार कैसे होगा। कर्म का जब तक उदय रहेगा कर्म का बंध ही हमारे समझ में आता है। ना प्रकृति होती है। न ही किसी की कोई स्थिति आती है। यही सच्चा धर्म ध्यान है। घड़ी चलती नहीं है उसके घूमने से ही हम काल के अनुभव का अनुमान कर लेते हैं। इसी को नियमित नैमित्तिक संबंध कहते हैं। घड़ी का कांटा काल से उत्पन्न नहीं हुआ और घड़ी को काल की जानकारी भी नहीं है किंतु किसी किसी के मन में यह भाव आता है कि मैंने समय काल पकड़ लिया है, तो वही सब से बड़ी गलती है।
आज दयोदय परिसर में भारतीय वायु सेना के बहादुर कैप्टन अभिनदंन के परिवारजनों ने आचार्य श्री से आशीर्वाद लिया।
