जबलपुर। शहर के चर्चित पुलिस–पूर्व महापौर विवाद में बड़ा मोड़ सामने आया है। जिस मामले में शुरुआत में आरोपियों को “अज्ञात” बताकर FIR दर्ज की गई थी, अब वही केस STF (स्पेशल टास्क फोर्स) की जांच के बाद पूरी तरह बदल गया है।
STF की विस्तृत जांच में पूर्व महापौर प्रभात साहू सहित पांच लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है। इससे पूरे घटनाक्रम की परतें खुलने लगी हैं और शुरुआती जांच पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, मामले के शुरुआती दौर में आरोपियों की पहचान छिपाने की कोशिश की गई थी और FIR में स्पष्ट नाम शामिल नहीं किए गए थे। लेकिन मामला जब हाईकोर्ट पहुंचा, तो कोर्ट की सख्ती और निगरानी के बाद जांच की दिशा ही बदल गई। इसके बाद STF को जांच सौंपी गई, जिसने साक्ष्यों के आधार पर तथाकथित “अज्ञात” आरोपियों की पहचान कर ली।
गंभीर धाराओं में मामला दर्ज
जांच में सामने आया है कि आरोपियों पर मारपीट, धमकी देने और शासकीय कार्य में बाधा डालने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की संबंधित धाराओं के साथ-साथ मोटर व्हीकल एक्ट के तहत भी प्रकरण दर्ज किया गया है।
हाईकोर्ट की सख्ती बनी टर्निंग पॉइंट
इस पूरे घटनाक्रम में हाईकोर्ट का हस्तक्षेप निर्णायक साबित हुआ। कोर्ट के दबाव के बाद ही जांच में तेजी आई और जिन लोगों को पहले बचाने की कोशिश हो रही थी, वे अब कानून के दायरे में आ गए हैं। STF की रिपोर्ट फिलहाल सीलबंद बताई जा रही है, लेकिन विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया जा चुका है।
‘अज्ञात’ की परतें हुईं उजागर
STF की कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि “अज्ञात” के नाम पर दर्ज FIR में कई अहम तथ्यों को छिपाया गया था। अब जब आरोपी सामने आ चुके हैं, तो यह मामला न केवल कानूनी बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
फिलहाल, सभी आरोपियों पर कानून का शिकंजा कस चुका है और आगे की कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों के अनुसार जारी है।
