जबलपुर। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव इस वर्ष 4 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का अवतार भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि में मथुरा की कारागार में वसुदेव जी की पत्नी देवकी के गर्भ से हुआ था। भगवान विष्णु ने कंस के बढ़ते अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए श्रीकृष्ण के रूप में अपना आठवां अवतार लिया था।
ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद् पंडित सौरभ दुबे के अनुसार इस वर्ष 4 सितंबर को अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है। अष्टमी तिथि का प्रारंभ 3 सितंबर की रात्रि 1 बजकर 9 मिनट से हुआ और यह 4 सितंबर की रात 10 बजकर 50 मिनट तक रहेगी। वहीं रोहिणी नक्षत्र भी सूर्योदय से रात 10 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। इस कारण 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाना शास्त्रसम्मत माना गया है।
धर्म सिंधु, निर्णय सिंधु और जयसिंहकल्पकद्रुम आदि ग्रंथों के मत का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि वैष्णव परंपरा में उदयव्यापिनी अष्टमी तथा रोहिणी नक्षत्र को विशेष महत्व दिया जाता है। निर्णय सिंधु के अनुसार कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि में रोहिणी नक्षत्र की एक कला भी विद्यमान हो तो उसे जयंती कहा गया है और इस दिन उपवास का विशेष महत्व माना गया है।
मान्यता है कि मध्यरात्रि में जब अज्ञान रूपी अंधकार का नाश और ज्ञान रूपी प्रकाश का उदय हो रहा था, उसी समय भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य हुआ। इसलिए जन्माष्टमी का पर्व केवल उत्सव ही नहीं, बल्कि उपवास, जागरण और भगवान की विशेष सेवा-आराधना का पर्व भी माना जाता है।
इस वर्ष 4 सितंबर को भगवान श्रीकृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव मनाया जाएगा। देशभर में मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन, झांकियों और मध्यरात्रि में भगवान के जन्मोत्सव के आयोजन होंगे। श्रद्धालु व्रत रखकर पूरे नियम और संयम के साथ भगवान श्रीकृष्ण की आराधना करेंगे।
