जबलपुर। बरगी बांध के गेट खुलने पर तेज रफ्तार से छोड़े गए पानी ने अपना असर दिखा दिया है। बांध से निकली पानी की प्रचंड धार ने सामने बने करीब चार दशक पुराने छोटे पुल की जर्जर सुरक्षा दीवार को पलभर में क्षतिग्रस्त कर दिया। दीवार का मलबा सड़क पर आ जाने से पुल के दोनों ओर चार पहिया वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो गई।
जिले और आसपास के इलाकों में हुई बारिश के बाद बरगी बांध का जलस्तर बढ़ने पर उसे नियंत्रित करने के लिए 17 गेट खोले गए हैं। गेटों से निकल रहे पानी का दबाव इतना तेज है कि लंबे समय से कमजोर पड़ी पुल की सुरक्षा दीवार आखिरकार उसका सामना नहीं कर सकी।
घटना के बाद पुल से गुजरने वाले वाहन चालकों के लिए खतरा बढ़ गया है। खासकर रात के समय क्षतिग्रस्त हिस्से का अंदाजा लगाना मुश्किल हो सकता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक पुल ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है और यहां से रोज बड़ी संख्या में लोग आते जाते हैं।
नागरिकों ने प्रशासन से तत्काल मलबा हटाने, मौके पर सुरक्षा इंतजाम करने और क्षतिग्रस्त दीवार की मरम्मत कराने की मांग की है।
जिले और आसपास के इलाकों में हुई बारिश के बाद बरगी बांध का जलस्तर बढ़ने पर उसे नियंत्रित करने के लिए 17 गेट खोले गए हैं। गेटों से निकल रहे पानी का दबाव इतना तेज है कि लंबे समय से कमजोर पड़ी पुल की सुरक्षा दीवार आखिरकार उसका सामना नहीं कर सकी।
घटना के बाद पुल से गुजरने वाले वाहन चालकों के लिए खतरा बढ़ गया है। खासकर रात के समय क्षतिग्रस्त हिस्से का अंदाजा लगाना मुश्किल हो सकता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक पुल ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है और यहां से रोज बड़ी संख्या में लोग आते जाते हैं।
नागरिकों ने प्रशासन से तत्काल मलबा हटाने, मौके पर सुरक्षा इंतजाम करने और क्षतिग्रस्त दीवार की मरम्मत कराने की मांग की है।
