जबलपुर। शहर में रेडमेसिविर इंजेक्शन की कमी को पूरा करने में शासन-प्रशासन सफल होते नहीं दिख रहा है। कोरोना मरीज के परिजन इंजेक्शन पाने के लिए न केवल भटक रहे हैं बल्कि अपनी क्षमता से ज्यादा पैसे देने भी तैयार हैं। इसके बाद भी उनके हाथों में निराशा ही हाथ लग रही है। रविवार को रेडक्रास कार्यालय के चक्कर लगाते रहे। खासतौर पर बाहर से इलाज कराने आए मरीजों के परिजन यहां दिनभर रेडमेसिविर इंजेक्शन पाने की उम्मीद में बैठे रहे।
शनिवार तक जिला रेडक्रास कार्यालय से निजी अस्पतालों को रेडमेसिविर इंजेक्शन की उपलब्धता कराई गई थी। रविवार को यहां पर सन्नाटा पसरा रहा। वजह थी मात्र 24 घन्टे में अपना आदेश पलटते हुए इंजेक्शन वितरण व्यवस्था में सरकार द्वारा बदलाव कर देना। रविवार को यहां से किसी को भी कार्यालय से इंजेक्शन नहीं दिए जा रहे थे। सब कुछ अब स्टाॅकिस्ट के हाथों में सौंप दिया गया। इस बात से वे लोग अंजान थे जो अन्य जगहों से इस शहर में अपने मरीज का इलाज कराने आए और उनकी गम्भीरता को देखते हुए जान बचाने के लिए कुछ भी तैयार हैं। सुबह उन्हें जानकारी मिली कि एक दिन पहले रेडक्रास से इंजेक्शन बांटे गए हैं, बस फिर क्या था अपनों की जान बचाने के लिए वे किसी तरह पतासाजी करते हुए वहां पहुंच गए। लेकिन रेडक्रास कार्यालय के मुख्य द्वार पर लटके ताले ने उनको निराश कर दिया। यहां-वहां भटकने के बाद कार्यालय की एक खिड़की खुली देखी तो वहीं से झांककर अंदर देखने लगे। बमुश्किल कार्यालय में दो लोग दिखे तो उनसे इंजेक्शन के बारे में जानकारी ली। जब पता चला कि यहां से इंजेक्शन का वितरण बंद हो गया है तो उनके दिल एक बार फिर बोझिल हो गए। कार्यालय के कर्मचारी यह भी नहीं बता पा रहे थे कि ऐसी स्थिति में अब ये लोग किस से गुहार लगाएं। गौरतलब है कि रविवार होने के कारण कलेक्टर कार्यालय में भी कोई अधिकारी नहीं था जिसके सामने जाकर ये अपनी व्यथा सुनाकर परिजन की जान बचाने के लिए गिड़गिड़ा सकें। शायद यह भी एक वजह है जो आपदा में अवसर तालशने वालों को रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने का पूरा मौका मिल रहा है।
इंजेक्शन के लिए पूछताछ करते मरीजों के परिजन

