किराया दो या ऑफिस खाली करो, गैर मान्यता प्राप्त यूनियनों को अल्टीमेटम - Khabri Guru

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किराया दो या ऑफिस खाली करो, गैर मान्यता प्राप्त यूनियनों को अल्टीमेटम

जबलपुर। पश्चिम मध्य रेलवे में यूनियनों के बीच वर्चस्व की जंग अब कानूनी और वित्तीय संकट का रूप ले चुकी है। पिछले वर्षों में हुए यूनियन चुनावों के बाद रेल प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ ही एकमात्र आधिकारिक मान्यता प्राप्त यूनियन है।

नियमों के अनुसार, चुनाव हारने वाली यूनियनों को मिलने वाली सभी सरकारी सुविधाएं और कार्यालय आवंटन स्वतः समाप्त हो जाते हैं। इसके बावजूद, गैर-मान्यता प्राप्त वेस्ट सेंट्रल रेलवे एम्प्लाइज यूनियन (WCREU) द्वारा कई रेलवे स्टेशनों और परिसरों में अब भी अनधिकृत रूप से कार्यालय संचालित किए जा रहे हैं।

अब इस मामले को गंभीरता से लेते हुए रेल प्रशासन ने भारी-भरकम डैमेज चार्ज (पैनल रेंट) वसूलने की कार्रवाई शुरू कर दी है।

कोटा मंडल में 3 करोड़ से अधिक का जुर्माना

सबसे बड़ी कार्रवाई कोटा मंडल में देखने को मिली है, जहां WCREU पर दिसंबर 2024 से सितंबर 2025 तक की अवधि के लिए कुल 3 करोड़ 12 लाख 29 हजार 491 रुपये का डैमेज चार्ज लगाया गया है।

रेल प्रशासन द्वारा जारी नोटिस के अनुसार यूनियन को यह राशि एक माह के भीतर जमा करना अनिवार्य है, अन्यथा कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि समय पर भुगतान नहीं हुआ तो यूनियन की अन्य निधियों से यह राशि काटने का अधिकार प्रशासन को होगा।

जबलपुर और भोपाल मंडल भी रडार पर

कोटा की तर्ज पर अब जबलपुर और भोपाल मंडलों में भी अवैध रूप से काबिज यूनियन कार्यालयों की सूची तैयार की जा रही है। रेल सूत्रों के मुताबिक इन मंडलों में भी जुर्माने की राशि करोड़ों रुपये तक पहुंच सकती है।

रेल प्रशासन का कहना है कि सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जा किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और बाजार दर से कई गुना अधिक डैमेज चार्ज वसूल कर उसे राजस्व में जमा कराया जाएगा।

अगले चुनावों से बाहर होने का भी खतरा

इस पूरे मामले पर आधिकारिक रुख स्पष्ट करते हुए यूनियन प्रवक्ता सतीश कुमार ने बताया कि यदि निर्धारित समय सीमा में डैमेज रेंट का भुगतान नहीं किया गया और कार्यालय खाली नहीं किए गए, तो संबंधित यूनियन के खिलाफ बेदखली की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

इतना ही नहीं, नियमों का उल्लंघन करने वाली यूनियनों को भविष्य के रेलवे यूनियन चुनावों में भाग लेने से भी प्रतिबंधित किया जा सकता है।

कर्मचारियों में नाराजगी

इस घटनाक्रम से आम रेल कर्मचारियों में भारी नाराजगी और चिंता है। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मेहनत की कमाई से दिए गए चंदे का पैसा, यूनियन पदाधिकारियों की जिद और लापरवाही के कारण जुर्माने में बर्बाद हो रहा है।

यदि समय रहते कार्यालय खाली कर दिए जाते तो यूनियन करोड़ों रुपये के इस भारी वित्तीय बोझ से बच सकती थी। अब देखना यह है कि प्रशासन की सख्ती के बाद गैर-मान्यता प्राप्त यूनियनें कार्यालय खाली करती हैं या यह कानूनी लड़ाई और लंबी खिंचती है।

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