देश की सुरक्षा के लिए सीमा पर खड़ा जवान अगर यह समझता है कि उसका घर सुरक्षित है, तो यह उसकी सबसे बड़ी भूल है। ग्वालियर का मामला बताता है कि आज के भारत में दुश्मन सिर्फ सीमा पार नहीं, बल्कि किराए के मकानों के भीतर भी बैठा है।
CRPF के जवान रौनक सिंह धाकड़ जम्मू-कश्मीर में देश की रक्षा कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर ग्वालियर में उनके घर की रक्षा करने वाला कोई नहीं था। न सेना, न पुलिस और न ही वह व्यवस्था, जो हर मंच से “जवानों के सम्मान” के नारे लगाती है।
मार्च 2025 में घर किराए पर दिया, और फरवरी 2026 आते-आते किरायेदार शैलेंद्र गुर्जर ने न सिर्फ मकान पर कब्जा कर लिया, बल्कि जवान की पत्नी को भी घर से बाहर निकाल दिया। ऊपर से जान से मारने की धमकी — यानी अब देश में अपराध का नया मॉडल:
“किराया दो, कब्जा लो, धमकी फ्री।”
जवान आठ महीने से थानों और अफसरों के चक्कर लगा रहा है। सवाल यह नहीं कि कार्रवाई क्यों नहीं हुई, सवाल यह है कि क्या सरकार की जिम्मेदारी अब सिर्फ भाषणों और पोस्टरों तक सीमित रह गई है?
सीएसपी नागेंद्र सिकरवार ने जांच का आश्वासन दिया है। आश्वासन — वही सरकारी शब्द, जो फाइलों में जिंदा रहता है और पीड़ित की उम्मीदों को धीरे-धीरे मार देता है।
आज हाल यह है कि जवान सीमा पर गोली से लड़ रहा है और उसका परिवार सिस्टम से। अगर एक सैनिक को न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़े, तो आम नागरिक का क्या हाल होगा, इसका अंदाजा सरकार को नहीं, सिर्फ जनता को है।
CRPF के जवान रौनक सिंह धाकड़ जम्मू-कश्मीर में देश की रक्षा कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर ग्वालियर में उनके घर की रक्षा करने वाला कोई नहीं था। न सेना, न पुलिस और न ही वह व्यवस्था, जो हर मंच से “जवानों के सम्मान” के नारे लगाती है।
मार्च 2025 में घर किराए पर दिया, और फरवरी 2026 आते-आते किरायेदार शैलेंद्र गुर्जर ने न सिर्फ मकान पर कब्जा कर लिया, बल्कि जवान की पत्नी को भी घर से बाहर निकाल दिया। ऊपर से जान से मारने की धमकी — यानी अब देश में अपराध का नया मॉडल:
“किराया दो, कब्जा लो, धमकी फ्री।”
जवान आठ महीने से थानों और अफसरों के चक्कर लगा रहा है। सवाल यह नहीं कि कार्रवाई क्यों नहीं हुई, सवाल यह है कि क्या सरकार की जिम्मेदारी अब सिर्फ भाषणों और पोस्टरों तक सीमित रह गई है?
सीएसपी नागेंद्र सिकरवार ने जांच का आश्वासन दिया है। आश्वासन — वही सरकारी शब्द, जो फाइलों में जिंदा रहता है और पीड़ित की उम्मीदों को धीरे-धीरे मार देता है।
आज हाल यह है कि जवान सीमा पर गोली से लड़ रहा है और उसका परिवार सिस्टम से। अगर एक सैनिक को न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़े, तो आम नागरिक का क्या हाल होगा, इसका अंदाजा सरकार को नहीं, सिर्फ जनता को है।
