वाह री अफसरशाही : निलंबन की गाज भी वहां, जहां जिम्मेदारी नहीं!” - Khabri Guru

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वाह री अफसरशाही : निलंबन की गाज भी वहां, जहां जिम्मेदारी नहीं!”


मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले के कोतमा नगर में हुए लॉज हादसे ने एक बार फिर सरकारी कार्यप्रणाली का वह क्लासिक मॉडल सामने रख दिया है—“गलती किसी की, सजा किसी और की”। बस स्टैंड के पास अग्रवाल लॉज के बगल में खोदे गए गड्ढे ने तीन जिंदगियां निगल लीं, लेकिन जिम्मेदारी का गड्ढा इतना गहरा निकला कि उसमें सच भी कहीं दब गया।
कलेक्टर हर्षल पंचोली ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए उपयंत्री वंदना अवस्थी और सहायक राजस्व निरीक्षक योगेंद्रनाथ तिवारी को निलंबित कर दिया। वजह बताई गई—अनुशासनहीनता और लापरवाही। लेकिन मज़ेदार बात यह है कि जिन वंदना अवस्थी पर गाज गिरी, वे उस वार्ड की प्रभारी ही नहीं थीं, जहां हादसा हुआ। यानी मैदान कहीं और, आउट कोई और!
अब सवाल उठता है कि वार्ड नंबर 5 में गड्ढा खोदा गया, लेकिन कार्रवाई वार्ड 8-15 की प्रभारी पर क्यों? क्या असली जिम्मेदारों को “सेफ ज़ोन” में रखा गया? या फिर यह वही पुराना खेल है—“ऊपर से दबाव, नीचे से बलि”?
हादसे की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं। स्थानीय निवासी रामनरेश गर्ग ने व्यावसायिक निर्माण के लिए 12 फुट गहरा गड्ढा खोद डाला। गड्ढा पानी से भर गया और देखते ही देखते लॉज का हिस्सा उसी में समा गया। तीन लोगों की जान चली गई, कई घायल हो गए—लेकिन प्रशासन की नींद तब टूटी, जब मलबा बैठ चुका था।
अब कागजों में नियम-कायदों की पूरी फौज उतार दी गई—ABPAS 3.0, भूमि विकास नियम 2012, नियम 7(1), 7(3)… सबका हवाला दिया गया। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि 15 दिन से गड्ढा मौजूद था और किसी की नजर नहीं पड़ी। या यूं कहें—देखा सबने, किया किसी ने नहीं।
नगरपालिका के मुख्य अधिकारी पर उंगलियां उठ रही हैं, लेकिन कार्रवाई उन पर नहीं, बल्कि उन पर हुई जो सीधे तौर पर इस वार्ड से जुड़े ही नहीं थे। ऐसे में यह सवाल और गहरा जाता है कि क्या यह कार्रवाई न्याय है या सिर्फ “जिम्मेदारी ट्रांसफर योजना”?
कुल मिलाकर, कोतमा हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की उस मानसिकता का आईना है, जहां “ठीकरा वहीं फोड़ो, जहां विरोध कम हो”। अब देखना यह है कि जांच सच तक पहुंचती है या फिर यह मामला भी फाइलों के गड्ढे में हमेशा के लिए दफन हो जाएगा।

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