हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने स्पष्ट कहा कि परिवहन नीति बनाना और स्टेज कैरिज परमिट से जुड़े फैसले लेना राज्य सरकार का अधिकार क्षेत्र है। लागू नियमों और संशोधित प्रावधानों के आधार पर जारी आदेश को अवैध नहीं माना जा सकता।
प्रदेशभर में कुल 899 बसें ऐसी हैं जो 15 साल से अधिक पुरानी हो चुकी हैं, लेकिन अभी भी सड़कों पर चल रही हैं। इससे यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही थी। आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक पुरानी बसें जबलपुर क्षेत्र में हैं, जबकि रीवा संभाग में इनकी संख्या सबसे कम है।
राज्य सरकार ने 14 नवंबर 2025 को आदेश जारी कर इन बसों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके विरोध में बस संचालकों ने हाईकोर्ट में करीब 10 याचिकाएं लगाई थीं, जिन्हें अब निरस्त कर दिया गया है।
बस ऑपरेटरों का तर्क था कि उनके पास वैध परमिट, फिटनेस प्रमाणपत्र और टैक्स जमा है, इसलिए यह नियम उन पर लागू नहीं होना चाहिए। हालांकि कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
नियमों की स्थिति मध्य प्रदेश मोटरयान नियम, 1994 के अनुसार—
10 साल से अधिक पुरानी बसों को अंतरराज्यीय परमिट नहीं दिया जाता
15 साल से पुरानी बसों को राज्य के भीतर भी परमिट नहीं मिलता
20 साल से अधिक पुरानी गाड़ियों को किसी भी तरह का परमिट नहीं दिया जाता
लापरवाही भी उजागर मामले में यह बात भी सामने आई कि परिवहन विभाग के कुछ अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी करते हुए पुराने वाहनों को परमिट जारी किए, जिसके चलते ये बसें अब तक सड़कों पर चल रही थीं।
आगे की कार्रवाई हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब इन सभी पुरानी बसों को हटाने की प्रक्रिया तेज होगी। इससे सड़कों पर चलने वाले वाहनों की गुणवत्ता में सुधार और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
