स्थानीय नागरिकों में इस स्थिति को लेकर गहरा आक्रोश है। उनका आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद न तो नगर निगम और न ही क्षेत्रीय पार्षद ने कोई ठोस कदम उठाया। कभी-कभार औपचारिक कार्रवाई जरूर होती है, लेकिन कुछ ही दिनों में वही दुकानें दोबारा लग जाती हैं, जिससे कार्रवाई की गंभीरता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
यह मामला केवल नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ है। खुले में बिक रहे मांस और मछली से गंदगी फैल रही है और संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस समस्या पर चुप्पी साधे हुए हैं।
अब क्षेत्र के लोगों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सख्त और स्थायी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। नागरिकों का कहना है कि प्रशासन की यह लापरवाही अब असहनीय हो चुकी है और जल्द समाधान जरूरी है।
