जानकारी के मुताबिक बगदरी जंगल क्षेत्र में एक पेड़ पर कई दिन पुराना शव लटका मिला था। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम एवं पहचान की प्रक्रिया के लिए अपने कब्जे में लिया। काफी प्रयासों के बाद भी मृतक की पहचान नहीं हो सकी, जिसके चलते शव को लावारिस घोषित कर दिया गया।
इसके बाद नगर परिषद कर्मचारियों ने शव को दफनाने के लिए खकरिया मार्ग स्थित कचरा निष्पादन स्थल के पास ले जाया। आरोप है कि शव को ले जाने के लिए किसी एंबुलेंस या शव वाहन की व्यवस्था नहीं की गई, बल्कि नगर परिषद द्वारा कचरा परिवहन में उपयोग होने वाली ट्रैक्टर-ट्रॉली का इस्तेमाल किया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार ट्रॉली में पहले से कचरा भी मौजूद था।
घटना की जानकारी सामने आते ही नगरवासियों में नाराजगी फैल गई। लोगों का कहना है कि भले ही शव की पहचान न हो सकी हो, लेकिन अंतिम संस्कार के दौरान मानवीय सम्मान बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। नागरिकों ने सवाल उठाया कि क्या नगर परिषद के पास शव परिवहन की कोई वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी।
स्थानीय रहवासियों ने इस मामले को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में शव वाहन की स्थायी सुविधा उपलब्ध कराने की आवश्यकता भी जताई गई है।
मामले पर नगर परिषद के मुख्य नगरपालिका अधिकारी प्रेम सिंह चौहान ने कहा कि उन्हें इस संबंध में जानकारी नहीं थी और वे मामले की जानकारी लेकर जांच करवाएंगे। वहीं एसडीओपी अर्चना अहीर ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था, फिर भी इसकी जांच कराई जाएगी।
