पुलिस अधीक्षक ने प्रेसवार्ता में बताया कि मुख्य आरोपी आनंद राजपूत और मृतक अधिवक्ता राजेंद्र लोधी के बीच लंबे समय से अवैध रेत कारोबार और अन्य आपराधिक गतिविधियों को लेकर विवाद चल रहा था। इसी रंजिश के चलते हत्या की योजना बनाई गई। घटना वाले दिन शाम करीब पांच से छह बजे के बीच हाथीनाला क्षेत्र में दोनों पक्षों के बीच विवाद और मारपीट भी हुई थी। इसके बाद आरोपियों ने पूरी योजना के तहत अलग-अलग स्थानों पर चार लोगों को निगरानी के लिए तैनात किया। रात करीब आठ बजे राष्ट्रीय राजमार्ग पर दो हाईवा वाहनों की मदद से मृतकों को जानबूझकर निशाना बनाया गया। घटनास्थल से बरामद टाटा कंपनी के ट्रक का एक टूटा हुआ हिस्सा पुलिस के लिए अहम सुराग साबित हुआ, जिसके आधार पर पूरी साजिश का खुलासा हुआ।
जांच में यह भी सामने आया कि कथित डॉक्टर अमित खरे और मृतक राजेंद्र लोधी के बीच पैसों के लेन-देन तथा मेडिको-लीगल केस (एमएलसी) को लेकर विवाद था। पुलिस के अनुसार राजेंद्र लोधी द्वारा लगातार ब्लैकमेल किए जाने से परेशान होकर अमित खरे ने आनंद राजपूत के साथ मिलकर हत्या की साजिश में भूमिका निभाई।
तकनीकी साक्ष्यों, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर पुलिस ने डॉ. अमित खरे, राजा पटेल, अनुज ठाकुर, आनंद लोधी, भारत सिंह, अनिल पटेल, अरविंद्र लोधी और नरेंद्र सिंह को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया है। वहीं मामले के तीन अन्य आरोपी अनिल, ऋतुराज और प्रीतम अभी फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की विशेष टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना अभी जारी है और कथित डॉक्टर अमित खरे की अन्य गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस जघन्य वारदात में शामिल किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा और सभी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
