मुख्य वक्ता पं. अभिनेष अटल ने कहा कि राष्ट्र निर्माण व्यक्तियों से नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण से होता है। उन्होंने कहा कि महापुरुषों को जाति और वर्गों में बाँटने से समाज कमजोर होता है, इसलिए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प आवश्यक है।
मुख्य अतिथि डॉ. प्रहलाद पटेल ने कहा कि गुरु गोविन्द सिंह जी ने अपने पिता गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान से प्रेरणा लेकर सनातन धर्म की रक्षा हेतु अपने पुत्रों तक का बलिदान दिया।
इस अवसर पर आचार्य पं रोहित दुबे, सरदार परमवीर सिंह, पं कामता तिवारी, सरदार सुरजीत सिंह, पं जयनारायण तिवारी, लखविंदर कौर, पं अशोक पांडे, प्रहलाद अग्रवाल, एड रवि दुबे, टिकेंद्र यादव, चमन दोहरे, बच्चन श्रीवास्तव, रूपेंदर सिंह, दासप्रसाद अहिरवार, सरदार रविंदर चंदना, रामबाबू विश्वकर्मा, सरदार अवतार सिंह फरबा, राजेश सोनकर, सरदार सतनाम सिंह, सरदार पृथ्वी सिंह, उपस्थित थे।
कार्यक्रम की प्रस्तावना समरसता सेवा संगठन के अध्यक्ष श्री संदीप जैन ने रखी। संचालन मनोज सेठ ने किया एवं आभार उज्जवल पचौरी ने व्यक्त किया।
