जबलपुर। हथियार लाइसेंस व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। अब नए शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन, लाइसेंस नवीनीकरण और हथियार ट्रांसफर से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं केवल ऑनलाइन माध्यम से ही पूरी होंगी। ऑफलाइन आवेदन की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है।
नई व्यवस्था के तहत आवेदक भारत सरकार के निर्धारित पोर्टल www.ndalalis.gov.in� पर जाकर स्वयं आईडी बनाकर आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा इच्छुक व्यक्ति एमपी ऑनलाइन केंद्रों के माध्यम से भी आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।
ऑनलाइन आवेदन जमा होने के बाद इसकी जानकारी संबंधित एसडीएम और पुलिस अधिकारियों को भेजी जाएगी, जो नियमानुसार जांच प्रक्रिया पूरी करेंगे। इसके साथ ही जिले की लाइसेंस शाखा द्वारा पुराने शस्त्र लाइसेंसों का रिकॉर्ड भी तेजी से डिजिटल पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है।
जिले में हजारों शस्त्र लाइसेंस मौजूद हैं, जिनका अब तक रिकॉर्ड मैनुअल रूप में रखा जाता था। इस कारण यह पता लगाना मुश्किल होता था कि लाइसेंसधारी एक वर्ष में कितने कारतूस खरीद रहे हैं या उनके हथियार से जुड़ी अन्य जानकारी क्या है।
गृह मंत्रालय के निर्देशों के बाद अब सभी लाइसेंस और हथियारों का पूरा विवरण डिजिटल सिस्टम में दर्ज किया जा रहा है। इससे न केवल निगरानी आसान होगी, बल्कि हथियारों से जुड़ी जानकारी भी तत्काल उपलब्ध हो सकेगी, जिससे व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनने की उम्मीद है।
नई व्यवस्था के तहत आवेदक भारत सरकार के निर्धारित पोर्टल www.ndalalis.gov.in� पर जाकर स्वयं आईडी बनाकर आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा इच्छुक व्यक्ति एमपी ऑनलाइन केंद्रों के माध्यम से भी आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।
ऑनलाइन आवेदन जमा होने के बाद इसकी जानकारी संबंधित एसडीएम और पुलिस अधिकारियों को भेजी जाएगी, जो नियमानुसार जांच प्रक्रिया पूरी करेंगे। इसके साथ ही जिले की लाइसेंस शाखा द्वारा पुराने शस्त्र लाइसेंसों का रिकॉर्ड भी तेजी से डिजिटल पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है।
जिले में हजारों शस्त्र लाइसेंस मौजूद हैं, जिनका अब तक रिकॉर्ड मैनुअल रूप में रखा जाता था। इस कारण यह पता लगाना मुश्किल होता था कि लाइसेंसधारी एक वर्ष में कितने कारतूस खरीद रहे हैं या उनके हथियार से जुड़ी अन्य जानकारी क्या है।
गृह मंत्रालय के निर्देशों के बाद अब सभी लाइसेंस और हथियारों का पूरा विवरण डिजिटल सिस्टम में दर्ज किया जा रहा है। इससे न केवल निगरानी आसान होगी, बल्कि हथियारों से जुड़ी जानकारी भी तत्काल उपलब्ध हो सकेगी, जिससे व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनने की उम्मीद है।
