1500 वर्ष से संस्कारधानी को आशीष दे रहीं मां धूमावती देवी - Khabri Guru

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1500 वर्ष से संस्कारधानी को आशीष दे रहीं मां धूमावती देवी

 


बूढ़ी खेरमाई मंदिर में आस्था, तंत्र साधना और दिव्यता का अद्भुत संगम

जबलपुर। शहर के बैनी सिंह की तलैया, चार खंबा क्षेत्र में स्थित मां राजराजेश्वरी धूमावती बूढ़ी खेरमाई मंदिर अपनी प्राचीनता, आध्यात्मिक ऊर्जा और विशेष धार्मिक मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं के बीच अत्यंत पूजनीय स्थल बना हुआ है। लगभग 1500 वर्ष पुराने इस मंदिर को शक्तिपीठ के रूप में मान्यता प्राप्त है, जहां प्रतिदिन हजारों की संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

महाविद्याओं में विशेष स्थान
मां धूमावती को दस महाविद्याओं में सातवीं शक्ति माना जाता है। तंत्र साधना में इनका विशेष महत्व है और इन्हें तंत्र की अधिष्ठात्री देवी के रूप में जाना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार ऋग्वेद के रात्रिसूक्त में इन्हें ‘सुतरा’ कहा गया है, जिसका अर्थ है—भक्तों को सहजता से संकटों से पार लगाने वाली शक्ति। मान्यता है कि मां धूमावती अभाव, दुख और बाधाओं को दूर कर साधक को वैराग्य, ज्ञान और मोक्ष की दिशा प्रदान करती हैं।

आस्था का केंद्र, हर मनोकामना पूर्ण
मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते हैं। भक्तों का विश्वास है कि मां के आशीर्वाद से उनकी सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। यहां का वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण माना जाता है, जो भक्तों को मानसिक शांति और आध्यात्मिक बल प्रदान करता है।

नवरात्रि में विशेष आयोजन
नवरात्रि के दौरान मंदिर की रौनक कई गुना बढ़ जाती है। इस दौरान प्रतिदिन चार आरतियां आयोजित की जाती हैं, जिनमें रात्रि 3 बजे होने वाली विशेष आरती में भी हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। पंचमी तिथि पर शहर के विभिन्न मंदिरों, संस्थाओं और सामाजिक संगठनों द्वारा महाआरती कर मां का आशीर्वाद लिया जाता है।

जनजातीय आस्था से जुड़ा इतिहास
मंदिर की मान्यता केवल वैदिक परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध प्राचीन जनजातीय संस्कृति से भी जुड़ा हुआ है। गोंड, बैगा और अन्य जनजातियां मां खेरमाई को धरती माता और सुरक्षा की देवी के रूप में पूजती रही हैं। माना जाता है कि यह पूजा परंपरा वैदिक काल से भी पहले की है।

तंत्र साधना का प्रमुख केंद्र
मां धूमावती का यह मंदिर तंत्र साधकों के लिए विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि मां की कृपा के बिना कोई भी तांत्रिक साधना पूर्ण नहीं हो सकती। यहां साधक विशेष अनुष्ठान और साधना कर आध्यात्मिक सिद्धि प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।

जवारा विसर्जन और विशेष परंपराएं
बूढ़ी खेरमाई मंदिर की एक विशेष पहचान यहां निकलने वाली भव्य जवारा विसर्जन यात्रा है, जो कई किलोमीटर लंबी होती है और शहर के दूसरे दशहरे के रूप में जानी जाती है। हजारों भक्त ‘बाना’ लेकर इस यात्रा में शामिल होते हैं। ‘अग्नि झूला’ यहां की प्रमुख आकर्षण परंपराओं में से एक है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं।
श्रद्धालु घंटों इंतजार कर जवारा प्राप्त करते हैं और अखंड कलश व दिव्य जवारों के बीच मां के दर्शन करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से दर्शन और प्रार्थना करने पर मां सभी कष्ट दूर कर मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।

श्रृंगार और आयोजन
मंदिर में प्रतिदिन मां के विभिन्न स्वरूपों में श्रृंगार किया जाता है, जो भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होता है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, यह स्थान केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस प्रकार मां राजराजेश्वरी धूमावती बूढ़ी खेरमाई मंदिर श्रद्धा, परंपरा, तंत्र साधना और लोक आस्था का अद्वितीय संगम है, जो सदियों से भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है।

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