जबलपुर से रोज़ाना बड़ी संख्या में यात्री मुंबई जाते हैं—किसी को व्यापारिक कार्य से, किसी को चिकित्सा कारणों से, तो किसी को अंतरराष्ट्रीय उड़ान पकड़नी होती है। ऐसे में मुंबई एयरपोर्ट की बजाय नवी मुंबई शिफ्ट करना गंभीर असुविधा खड़ी करेगा। जिन यात्रियों को साउथ मुंबई या इंटरनेशनल टर्मिनल पहुँचना होता है, उनके लिए यह फैसला समय, पैसा और मानसिक तनाव—तीनों बढ़ाने वाला साबित होगा।
बताया जा रहा है कि नागपुर, इंदौर और रायपुर जैसे शहरों से भी एक-एक उड़ान नवी मुंबई के लिए शिफ्ट की जा रही है, लेकिन वहाँ मुंबई के लिए कई वैकल्पिक उड़ानें उपलब्ध हैं। जबकि जबलपुर की स्थिति बिल्कुल अलग है—यहाँ मुंबई के लिए सीमित उड़ानें हैं। ऐसे में इकलौती प्रभावी कनेक्टिविटी को नवी मुंबई स्थानांतरित करना पूरी तरह अनुचित और भेदभावपूर्ण निर्णय प्रतीत होता है।
यह सवाल भी उठता है कि अगर नवी मुंबई के लिए भारी मांग थी, तो नई उड़ान क्यों नहीं शुरू की गई? पुरानी मुंबई फ्लाइट को बरकरार रखते हुए अतिरिक्त सेवा शुरू की जा सकती थी। लेकिन यहाँ तो सीधे-सीधे पुरानी सुविधा ही खत्म कर दी गई।
यात्रियों की नाराजगी का एक और कारण है—हैदराबाद उड़ान का समय बदलना। अब सुबह की बजाय दोपहर में उड़ान होगी, जिससे गोवा, चेन्नई, कोलकाता जैसे शहरों के कनेक्शन प्रभावित होंगे। व्यापारिक और प्रोफेशनल यात्रियों के लिए यह बदलाव बड़ा नुकसान साबित हो सकता है।
अब सवाल उठता है कि क्या जबलपुर हमेशा ऐसे ही फैसलों का शिकार बनता रहेगा? क्या यहाँ के जनप्रतिनिधि चुप बैठेंगे या यात्रियों की आवाज़ बनकर सामने आएँगे? यह समय है जबलपुर के हित में ठोस पहल का।
एयरलाइन प्रबंधन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय को इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए। जबलपुर के यात्रियों के साथ यह अन्याय बंद होना चाहिए। यदि नवी मुंबई के लिए सेवा शुरू करनी ही है, तो पुरानी मुंबई उड़ान को बरकरार रखते हुए नई सुविधा दी जाए—न कि पुरानी सुविधा छीनकर।
जबलपुर की जनता अब जवाब चाहती है।
