हादसे के तुरंत बाद प्लांट परिसर में अफरा-तफरी मच गई और चारों तरफ चीख-पुकार सुनाई देने लगी। सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जबकि गंभीर रूप से घायल मजदूरों को बेहतर इलाज के लिए अन्य अस्पतालों में रेफर किया गया। सुरक्षा के मद्देनजर प्लांट के आसपास के इलाके को खाली कराया गया और अतिरिक्त बल तैनात किया गया।

इस घटना पर नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई है। वहीं विष्णु देव साय ने भी इस हादसे को अत्यंत दुखद बताते हुए घायलों के समुचित इलाज के निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को दो लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।
प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं और हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जानकारी में बॉयलर ट्यूब में खराबी या अत्यधिक दबाव को हादसे की वजह माना जा रहा है, हालांकि वास्तविक कारण जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे।
यह घटना एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े करती है और यह जरूरी हो जाता है कि ऐसे संवेदनशील स्थानों पर काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके।

