सड़क पर भर रहे बस, कार्रवाई पर बवाल - Khabri Guru

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सड़क पर भर रहे बस, कार्रवाई पर बवाल


जबलपुर में पिछले 15 दिनों से चल रही आरटीओ कार्रवाई को लेकर बस ऑपरेटरों ने भले ही प्रदर्शन कर दिया हो, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश करती है। दीनदयाल चौक, आईएसबीटी और दमोह नाका जैसे व्यस्त इलाकों में बसों की मनमानी खड़ी व्यवस्था लंबे समय से शहरवासियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है।

अतिक्रमण या “सवारी भरने” का बहाना?

बस ऑपरेटरों का तर्क है कि वे सिर्फ 5-10 मिनट सवारी भरने के लिए रुकते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि यही “कुछ मिनट” कई बार आधे घंटे में बदल जाते हैं। दीनदयाल चौक से लेकर वन विभाग चेक पोस्ट तक बसों का जमावड़ा आम बात हो गई है। नतीजा—लंबा जाम, परेशान यात्री और फंसी हुई एंबुलेंस।


आरटीओ की कार्रवाई क्यों जरूरी?

क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी रिंकू शर्मा के नेतृत्व में की जा रही कार्रवाई को एकतरफा बताना आसान है, लेकिन यह भी देखना होगा कि:

👉 बसें तय स्टैंड छोड़कर सड़कों पर खड़ी हो रही हैं

👉 ट्रैफिक नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है

👉 एंबुलेंस जैसी आपात सेवाएं जाम में फंस रही हैं

👉 आम जनता को रोजाना देरी और परेशानी झेलनी पड़ रही है

ऐसे में परिवहन विभाग की कार्रवाई सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि जनहित में जरूरी कदम है।


बस हड़ताल की चेतावनी

बस संचालकों ने हड़ताल की चेतावनी दी है, लेकिन सवाल उठता है—क्या नियमों का पालन करने के बजाय दबाव बनाना सही तरीका है? अगर हर वाहन चालक यही रवैया अपनाए, तो शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी। यात्रियों की परेशानी बनाम ऑपरेटरों का हित

दमोह नाका पर बस जब्ती के दौरान यात्रियों को हुई परेशानी जरूर गंभीर है, लेकिन यह भी सच है कि अव्यवस्थित संचालन का खामियाजा रोजाना हजारों लोग भुगतते हैं। छोटे बच्चे, बुजुर्ग और मरीज सब इस अव्यवस्था के शिकार होते हैं।


आरटीओ की कार्रवाई को “मनमानी” बताने से पहले बस ऑपरेटरों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। सड़क कोई निजी स्टैंड नहीं है। नियमों का पालन ही व्यवस्था को बनाए रख सकता है। अगर सख्ती नहीं होगी, तो अराजकता ही बढ़ेगी—और उसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा।

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