जबलपुर। संस्कारधानी जबलपुर में सावन के दूसरे सोमवार को निकली प्रदेश की प्रमुख कांवड़ यात्राओं में शामिल संस्कार कांवड़ यात्रा के दौरान इंसानियत और भाईचारे की ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने शहरवासियों का दिल जीत लिया।
गौरीघाट से शुरू होकर माता मार स्थित कैलाश धाम तक जाने वाली कांवड़ यात्रा जब सड़क मार्ग से गुजर रही थी, उसी दौरान बहरा मुस्लिम समुदाय के एक परिवार का जनाजा भी अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जा रहा था। जैसे ही कांवड़ियों की नजर जनाजे पर पड़ी, यात्रा कुछ देर के लिए थम गई।
कांवड़ियों ने सम्मानपूर्वक डीजे बंद कराया और जनाजे के सम्मान में सिर झुकाकर मृत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इस दौरान रास्ते में मौजूद श्रद्धालुओं ने भी सद्भाव और भाईचारे का परिचय दिया।
यह दृश्य इस बात का संदेश दे गया कि इंसानियत और एक-दूसरे की आस्था का सम्मान ही सबसे बड़ा धर्म है। कांवड़ यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के इस व्यवहार ने जबलपुर की उस पहचान को और मजबूत किया, जिसके कारण इसे 'संस्कारधानी' कहा जाता है।
सोशल मीडिया पर सामने आए इस वीडियो और घटना की तस्वीरों को लोग जमकर साझा कर रहे हैं। लोग इसे जबलपुर की गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे की मिसाल बता रहे हैं।
वास्तव में, यही है संस्कारधानी जबलपुर—जहां आस्था के साथ इंसानियत भी सर्वोपरि है।
