जबलपुर। कब, कौनसी बात आपके दिल को छू जाए और वही बात आपके लिए प्रेरणा बन जाए, यह कहा नहीं जा सकता। ऐसा ही कुछ हुआ जबलपुर के गोहलपुर सीएसपी अखिलेश गौर के साथ, जब शांति समिति की बैठक में एक सदस्य ने साधारण सी बात कह दी। उक्त सदस्य का कहना था कि आप अधिकारियों को लाॅकडाउन जैसे प्रयोगों से कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि नौकरी में हर माह आपको वेतन जो मिल जाता है। जबकि आम आदमी के दिल से पूछिये कि उसे परिवार के सदस्यों के लिए किस तरह रोजी रोटी का इंतजाम करना होता है। बस फिर क्या था, सीएसपी गौर ने भी कुछ हट कर करने का संकल्प ले लिया। आखिर में उन्होंने तय किया कि वे अपनाा एक माह का वेतन कोरोना इलाजरत मरीजों के हितार्थ मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा कराएंगे। कोरोना संक्रमण के बीच कई तरह की सकारात्मक पहल भी हो रही हैं, उनमें से एक यह भी है। सीएसपी गौर का कहना है कि उन्होंने जो कुछ भी किया वह अपनी अंतरात्मा की आवाज पर किया।
सीएसपी ने सीएम को संबोधित पत्र में लिखा है, एक माह से कई परिवारों ने प्रिय सदस्यों को खोया है। कई लोगों ने रोजगार खोया है। संकट की घड़ी में शासन-प्रशासन ऐसे लोगों के साथ भावनात्मक और आर्थिक रूप से खड़ा है। इस समय जनता को अधिकारियों की सेवा और त्याग भाव की आवश्यकता है।
इससे लोगों में शासन व्यवस्था के प्रति विश्वास पैदा होगा और हमें सहयोग मिलेगा। जनता के बिना सहयोग के इस महामारी से लड़ना कठिन है। मैं जानता हूं यह सूक्ष्म सहयोग है, लेकिन मेरा विश्वास है कि बूंद-बूंद से सागर बनता है, इसलिए इसे स्वीकार करें, ताकि इससे प्रेरित होकर जनसेवा कर सकूं।
ऐसे मिली थी प्रेरणा
सीएसपी अखिलेश गौर के मुताबिक पिछले दिनों लॉकडाउन के संबंध में शांति समिति की बैठक हो रही थी। उस समय जब लॉकडाउन के संबंध में लोगों से चर्चा की गई, तो एक नागरिक ने अधिकारियों से सवाल किया कि आप लोगों को तो सैलरी मिल रही है, इसलिए आप लॉकडाउन के पक्ष में हैं, लेकिन बाकी आम जन को एक माह से रोजगार नहीं मिलेगा और ना उनके पास अन्य साधन है। क्या आप लोग भी सैलरी लेने से मना कर सकते हैं? इसी सवाल ने अंतरात्मा की झकझोरा और फिर निर्णय ले पाया।
सीएसपी ने सीएम को संबोधित पत्र में लिखा है, एक माह से कई परिवारों ने प्रिय सदस्यों को खोया है। कई लोगों ने रोजगार खोया है। संकट की घड़ी में शासन-प्रशासन ऐसे लोगों के साथ भावनात्मक और आर्थिक रूप से खड़ा है। इस समय जनता को अधिकारियों की सेवा और त्याग भाव की आवश्यकता है।
इससे लोगों में शासन व्यवस्था के प्रति विश्वास पैदा होगा और हमें सहयोग मिलेगा। जनता के बिना सहयोग के इस महामारी से लड़ना कठिन है। मैं जानता हूं यह सूक्ष्म सहयोग है, लेकिन मेरा विश्वास है कि बूंद-बूंद से सागर बनता है, इसलिए इसे स्वीकार करें, ताकि इससे प्रेरित होकर जनसेवा कर सकूं।
ऐसे मिली थी प्रेरणा
सीएसपी अखिलेश गौर के मुताबिक पिछले दिनों लॉकडाउन के संबंध में शांति समिति की बैठक हो रही थी। उस समय जब लॉकडाउन के संबंध में लोगों से चर्चा की गई, तो एक नागरिक ने अधिकारियों से सवाल किया कि आप लोगों को तो सैलरी मिल रही है, इसलिए आप लॉकडाउन के पक्ष में हैं, लेकिन बाकी आम जन को एक माह से रोजगार नहीं मिलेगा और ना उनके पास अन्य साधन है। क्या आप लोग भी सैलरी लेने से मना कर सकते हैं? इसी सवाल ने अंतरात्मा की झकझोरा और फिर निर्णय ले पाया।
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