जबलपुर। गोराबाजार मुख्य मार्ग पर संचालित शराब दुकान के विरोध में करीब एक महीने से चल रहे आंदोलन के बीच आखिरकार ठेकेदार ने दुकान पर ताला लगा दिया। ठेकेदार ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए आबकारी विभाग को लिखित सूचना देकर दुकान बंद रखने की जानकारी दी है। दुकान बंद होने के बाद आंदोलन कर रहे स्थानीय नागरिकों और महिलाओं में उत्साह है, वहीं आबकारी विभाग के सामने राजस्व नुकसान और दुकान के लिए वैकल्पिक स्थान तलाशने की चुनौती खड़ी हो गई है।
क्षेत्रीय नागरिकों और महिलाओं ने 15 जुलाई से शराब दुकान के खिलाफ लगातार आंदोलन किया था। विरोध के दौरान दो बार पूरा बाजार बंद कराया गया, जबकि 16 अगस्त को महिलाओं ने स्वयं दुकान में ताला लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया था। लगातार बढ़ते जनविरोध के बाद ठेकेदार ने अब दुकान बंद करने का फैसला लिया है।
बिलहरी के लाइसेंस पर गोराबाजार में संचालन का आरोप
विवादित शराब दुकान को लेकर प्रशासनिक जांच में कई सवाल सामने आए हैं। राजस्व अधिकारियों की जांच-पड़ताल में दुकान के धार्मिक स्थल के नजदीक संचालित होने की बात सामने आई थी। वहीं छावनी परिषद प्रशासन की जांच में भी अनियमितताओं की ओर इशारा किया गया है।
रिकॉर्ड के मुताबिक दुकान का मूल लाइसेंस बिलहरी क्षेत्र के लिए स्वीकृत था, जबकि इसका संचालन गोराबाजार मुख्य बाजार में किया जा रहा था। आरोप है कि दुकान खोलने से पहले छावनी परिषद से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र भी नहीं लिया गया। इसी को लेकर स्थानीय लोगों में लंबे समय से नाराजगी बनी हुई थी।
नई जगह तलाशना आबकारी विभाग के लिए चुनौती
दुकान बंद होने के बाद अब आबकारी विभाग के सामने नया ठिकाना तलाशने की चुनौती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि रिहायशी इलाके में शराब दुकान किसी भी कीमत पर संचालित नहीं होने दी जाएगी। ऐसे में विभाग के लिए नियमों के अनुरूप उपयुक्त स्थान तलाशना आसान नहीं होगा।
भवन स्वामी को पीपीई एक्ट के तहत नोटिस
शराब दुकान जिस भवन में संचालित हो रही थी, उसके निर्माण को लेकर भी छावनी परिषद ने कार्रवाई शुरू की है। परिषद प्रशासन ने भवन स्वामी को पीपीई एक्ट के तहत नोटिस जारी कर जमीन के मालिकाना हक और भवन निर्माण की स्वीकृति से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं।
मामले की सुनवाई अगले माह के प्रथम सप्ताह में प्रस्तावित है। यदि जांच में निर्माण सरकारी जमीन पर अवैध रूप से किया जाना सामने आता है, तो परिषद द्वारा नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में शराब दुकान का विवाद अब केवल दुकान संचालन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि भवन और जमीन की वैधता की जांच तक पहुंच गया है।
लगातार विरोध, प्रशासनिक जांच और सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों के बीच ठेकेदार द्वारा दुकान बंद किए जाने को स्थानीय आंदोलन की बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है।
