जबलपुर। संस्कारधानी जबलपुर के गोकलपुर स्थित शासकीय बाल संप्रेषण गृह से बच्चों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि यहां बंद कुछ दबंग नाबालिगों का समूह नए आने वाले बच्चों से कथित तौर पर रंगदारी मांगता था। रकम नहीं देने पर मारपीट करने और ब्लेड से शरीर पर कट लगाने का आरोप है। शिकायत के बाद हुई औचक तलाशी में दो मोबाइल फोन, गुटखा-तंबाकू और गांजा बरामद होने से मामले ने और गंभीर रूप ले लिया है।
जमानत पर बाहर आए 17 वर्षीय नाबालिग ने बताई आपबीती
मामले का खुलासा बेलखेड़ा क्षेत्र निवासी 17 वर्षीय नाबालिग के जमानत पर बाहर आने के बाद हुआ। जानकारी के मुताबिक उसे लूट और आर्म्स एक्ट के मामले में 10 अगस्त को बाल संप्रेषण गृह भेजा गया था। 19 अगस्त को जमानत मिलने के बाद घर पहुंचने पर उसने परिजनों को सुधार गृह के भीतर कथित तौर पर हुई मारपीट और वसूली की जानकारी दी।
परिजनों के मुताबिक नाबालिग के दोनों हाथों पर चोट और कट के निशान थे। आरोप है कि एक दबंग लड़के ने उसके हाथ पर ब्लेड से अपना नाम तक खुरच दिया।
हर सप्ताह 1000 रुपये देने का दबाव
पीड़ित के पिता के अनुसार 12 अगस्त को बाल संप्रेषण गृह से बेटे का फोन आया था। उसने कथित तौर पर बताया कि यदि अंदर सुरक्षित रहना है तो हर सप्ताह 1000 रुपये देने होंगे। शुरुआत में परिवार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
आरोप है कि रकम नहीं मिलने के बाद करीब 10-12 नाबालिगों के समूह ने उसके साथ मारपीट की। इसी दौरान स्टेशनरी के शार्पनर से निकाली गई ब्लेड से उसके हाथों पर कई वार किए गए।
सर्चिंग में मोबाइल और गांजा बरामद
शिकायत सामने आने के बाद बाल संप्रेषण गृह प्रबंधन ने परिसर में सर्चिंग कराई। तलाशी के दौरान बैरकों से दो मोबाइल फोन, गुटखा-तंबाकू और गांजा बरामद होने की जानकारी सामने आई है।
बाल संप्रेषण गृह के अधीक्षक शैलेश कुमार और सहायक अधीक्षक अरुण कुमार ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि स्टेशनरी के लिए उपलब्ध शार्पनर की ब्लेड निकालकर घटना को अंजाम दिए जाने की बात सामने आई है।
बाल न्यायालय को भेजी रिपोर्ट
मामले में प्रबंधन की ओर से लिखित रिपोर्ट बाल न्यायालय (Juvenile Justice Board) को भेजी गई है। अब न्यायालय के निर्देश के आधार पर आगे की कानूनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
गोकलपुर स्थित बाल संप्रेषण गृह में करीब 50 नाबालिगों के रहने की जानकारी है। ऐसे में परिसर के भीतर मोबाइल फोन और मादक पदार्थ पहुंचना तथा बच्चों के बीच कथित तौर पर वसूली और मारपीट की घटना सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
जिस संस्थान का उद्देश्य कानून के संपर्क में आए बच्चों को सुरक्षित वातावरण देना और उन्हें सुधार की दिशा में आगे बढ़ाना है, वहां इस तरह की घटनाएं सामने आना चिंता का विषय है। अब जांच के जरिए यह स्पष्ट होना जरूरी है कि प्रतिबंधित सामान परिसर के भीतर कैसे पहुंचा और कथित वसूली व मारपीट की घटनाओं पर समय रहते निगरानी क्यों नहीं हो सकी।
