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YouTube से ट्रेनिंग लेकर बच्चों से कराता था चोरी, RPF ने 40 वर्षीय मास्टरमाइंड को दबोचा



जबलपुर। रेलवे स्टेशनों और चलती ट्रेनों में यात्रियों के मोबाइल और कीमती सामान चोरी करने वाले गिरोह का रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने भंडाफोड़ किया है। गिरोह का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह सामने आया है कि इसका कथित मास्टरमाइंड खुद वारदात करने के बजाय 12 से 16 वर्ष की उम्र के नाबालिग बच्चों का इस्तेमाल करता था। RPF ने 40 वर्षीय नितेश कुमार को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में सामने आया कि वह कथित तौर पर YouTube वीडियो और वेब सीरीज से अपराध के तरीके सीखकर बच्चों को चोरी की ट्रेनिंग देता था।

पैर खराब होने के बाद नाबालिगों को बनाया जरिया

RPF थाना प्रभारी राजीव खरब के अनुसार, नितेश कुमार पुराना अपराधी है और उसके खिलाफ जबलपुर में चोरी, लूट तथा आर्म्स एक्ट सहित 15 से अधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। करीब दो साल पहले एक दुर्घटना में उसका पैर खराब हो गया था। इसके बाद उसने खुद वारदातों में शामिल होने के बजाय नाबालिग बच्चों को अपराध में इस्तेमाल करने की योजना बनाई।

आरोपी ने कथित तौर पर बच्चों को इसलिए चुना क्योंकि नाबालिगों से जुड़े कानूनों के कारण उनके पकड़े जाने पर कार्रवाई की प्रकृति अलग होती है।

गरीब बस्तियों से बच्चों को जोड़ने का आरोप

जांच के मुताबिक आरोपी जबलपुर की गरीब बस्तियों और रेलवे स्टेशन के आसपास रहने वाले परिवारों के 12 से 16 साल के बच्चों को पैसों का लालच देकर अपने साथ जोड़ता था। इनमें मदार टेकरी, हनुमानताल और सिद्धबाबा की पहाड़ी सहित आसपास के क्षेत्रों के बच्चों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है।

RPF के अनुसार, आरोपी ने करीब 50 से 70 नाबालिगों को अपने नेटवर्क से जोड़ने की बात जांच में सामने आई है। बच्चों को वारदात से पहले कथित तौर पर करीब दो महीने तक ट्रेनिंग दी जाती थी।

ट्रेनों की गतिविधियों की जानकारी का उठाया फायदा

नितेश ने करीब 10 साल रेलवे स्टेशन पर वेंडर के रूप में काम किया था। इस दौरान उसे ट्रेनों के समय, यात्रियों की गतिविधियों और आउटर पर ट्रेनों के धीमे होने वाले स्थानों की जानकारी हो गई थी। इसी अनुभव का इस्तेमाल वह बच्चों को अपराध के तरीके सिखाने में करता था।

आरोप है कि बच्चों को सो रहे यात्रियों का सामान चोरी करने, भीड़ का फायदा उठाकर मोबाइल पार करने और ट्रेन के आउटर पर धीमे होते ही भागने जैसे तरीके बताए जाते थे।

18 साल होते ही गैंग से बाहर करने का आरोप

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी कथित तौर पर 18 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले बच्चों को गैंग से अलग कर देता था। इसके पीछे उद्देश्य बालिग होने के बाद उन पर लागू होने वाले कड़े कानूनी प्रावधानों से बचना बताया जा रहा है।

RPF कर रही नेटवर्क की जांच

RPF ने 17 अगस्त को नितेश कुमार को गिरफ्तार किया। अब जांच एजेंसी कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। साथ ही उन नाबालिगों की पहचान और उनके पुनर्वास की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं, जिन्हें कथित तौर पर चोरी की वारदातों में इस्तेमाल किया गया।

पुलिस चोरी के मोबाइल और अन्य सामान खरीदने वाले कथित रिसीवरों तथा कबाड़ियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ गिरोह के नेटवर्क और चोरी की वारदातों से जुड़े अन्य खुलासे होने की संभावना है।

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