भोपाल। मध्य प्रदेश में इस बार मानसून ने भले ही 9 दिन की देरी से दस्तक दी हो, लेकिन बाद के चरणों में बारिश ने जोर पकड़ा है। प्रदेश में अब तक सामान्य बारिश का करीब 65 प्रतिशत आंकड़ा पूरा हो चुका है। हालांकि बारिश का वितरण असमान रहने से पूर्वी मध्य प्रदेश के कई जिलों में स्थिति बेहतर है, जबकि इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग के कई इलाके अभी भी औसत बारिश से पीछे चल रहे हैं।
अगस्त के तीसरे सप्ताह में मानसून ट्रफ, डिप्रेशन और लो प्रेशर एरिया की सक्रियता के कारण प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में बारिश का दौर तेज हुआ। डिंडौरी, सिवनी समेत कई जिलों में भारी बारिश से बाढ़ जैसे हालात बने। नर्मदा और मंदाकिनी जैसी नदियों का जलस्तर बढ़ा, वहीं कई क्षेत्रों में झरने भी उफान पर आ गए।
27.4 इंच के मुकाबले 24.4 इंच बारिश
प्रदेश में अब तक औसतन 27.4 इंच बारिश होनी चाहिए थी, जबकि अभी तक करीब 24.4 इंच पानी गिरा है। यानी सामान्य आंकड़े से लगभग 3 इंच बारिश कम है। मौसम विभाग ने अगले सप्ताह भी प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में बारिश की कमी वाले जिलों में आंकड़ा सुधरने की उम्मीद है।
भोपाल, शहडोल, रीवा और जबलपुर संभाग में बारिश की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, जबकि इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग के कई जिले अब भी कमी से जूझ रहे हैं।
बांधों में 64 फीसदी से ज्यादा जलभराव
लगातार बारिश का असर प्रदेश के बड़े जलाशयों पर भी दिखाई दे रहा है। प्रमुख बांधों में औसतन 64 प्रतिशत से अधिक जलभराव दर्ज किया गया है। इंदिरा सागर में करीब 54%, गांधी सागर में 67%, बाणसागर में 65%, बारना में 76%, कोलार में 82%, महान में 77%, राजघाट में 86%, बरगी में 86%, ओंकारेश्वर में 30% और तवा में 46% जलभराव बताया गया है।
बरगी और जौहिला समेत कई बांधों के गेट भी खोले जा चुके हैं। हालांकि इंदौर और उज्जैन संभाग के कई जलाशयों में अभी पर्याप्त पानी नहीं पहुंचा है।
24 जून को पहुंचा था मानसून
मध्य प्रदेश में इस वर्ष मानसून ने 24 जून को दस्तक दी थी। इसके बाद महज नौ दिनों में मानसून ने पूरे प्रदेश को कवर कर लिया। जून में देरी के चलते प्रदेश में करीब 30 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई थी।
जुलाई के पहले सप्ताह में बारिश की स्थिति सुधरी और आंकड़ा सामान्य से 8 प्रतिशत अधिक तक पहुंच गया। इसके बाद जुलाई के दूसरे सप्ताह में मानसून कमजोर पड़ा, लेकिन तीसरे सप्ताह में एक बार फिर सक्रिय हुआ। अगस्त के दूसरे सप्ताह से बारिश का दौर और मजबूत हुआ, जो कई इलाकों में अब भी जारी है।
उमरिया-डिंडौरी में 34 इंच से ज्यादा बारिश
प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश का असर सबसे ज्यादा देखने को मिला है। उमरिया और डिंडौरी में अब तक 34 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की जा चुकी है। वहीं मुरैना प्रदेश का सबसे कम बारिश वाला जिला बना हुआ है, जहां करीब 12 इंच बारिश हुई है। भिंड में लगभग 22 इंच बारिश दर्ज की गई है।
कई जिलों में अब भी बारिश की कमी
बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी और टीकमगढ़ समेत कई जिलों में सामान्य से 1 से 51 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है।
पश्चिमी मध्य प्रदेश के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में भी सामान्य से 2 से 47 प्रतिशत तक कम बारिश बताई गई है।
15 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
प्रदेश के 15 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से ऊपर पहुंच गया है। इनमें अनूपपुर, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, बड़वानी, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, गुना, ग्वालियर, खंडवा, खरगोन और राजगढ़ शामिल हैं।
अब मौसम विभाग के अगले सप्ताह के पूर्वानुमान पर नजर है। यदि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहता है तो जिन जिलों में बारिश की कमी बनी हुई है, वहां स्थिति में काफी हद तक सुधार हो सकता है।
