जबलपुर। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस केंद्रीय कारागार में शनिवार को 18 बंदियों को अच्छे आचरण के आधार पर जेल नियमावली के तहत रिहा किया गया। रिहाई के दौरान जेल प्रशासन ने सभी बंदियों को सम्मानपूर्वक विदाई दी। लंबे समय बाद जेल की चारदीवारी से बाहर निकलते समय कई बंदियों की आंखें नम हो गईं।
रिहा होने वालों में एक महिला बंदी भी शामिल है। जेल में बिताए समय को याद करते हुए बंदियों ने कहा कि जाने-अनजाने में उनसे हुई गलतियों ने उनकी जिंदगी का महत्वपूर्ण समय छीन लिया। उन्होंने भविष्य में दोबारा अपराध की राह पर न जाने और जेल वापस नहीं आने का संकल्प लिया।
बंदियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जेल में बिताए वर्षों के कारण वे समाज और अपने साथियों से काफी पीछे छूट गए हैं। अब रिहाई के बाद उन्हें जिंदगी की नई शुरुआत करनी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि वे समाज में अपराधों की रोकथाम के लिए अपने स्तर पर लोगों को जागरूक करने का प्रयास करेंगे, ताकि दूसरे युवा ऐसी गलती न करें, जिसके चलते उन्हें जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़े।
जेल प्रशासन की ओर से बताया गया कि बंदियों के आचरण और जेल नियमावली में निर्धारित प्रावधानों के आधार पर 15 अगस्त के अवसर पर 18 बंदियों को रिहाई दी गई है।
अखिलेश तोमर, जेल अधीक्षक, नेताजी सुभाषचंद्र बोस केंद्रीय कारागार ने बताया कि अच्छे आचरण के आधार पर 18 बंदियों को रिहा किया गया है, जिनमें एक महिला बंदी भी शामिल है।
