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मेडिकल कॉलेज के 66 लाख के कैश कलेक्शन घोटाले में नया मोड़, तीन लिपिक SIT की हिरासत में

 

जबलपुर। नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में सामने आए करीब 66 लाख रुपए के कैश कलेक्शन घोटाले की जांच अब नए चरण में पहुंच गई है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) ने कैश शाखा से जुड़े तीन लिपिकों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। कार्रवाई की जानकारी मेडिकल कॉलेज परिसर में पहुंचते ही प्रशासनिक और कर्मचारी हलकों में हलचल तेज हो गई।

मामला वर्ष 2020 से 2025 के बीच मरीजों से ओपीडी पर्ची, विभिन्न जांच और अन्य सेवाओं के लिए प्राप्त राशि के बैंक में जमा होने तथा रिकॉर्ड में दर्ज रकम के बीच अंतर से जुड़ा है। मई में सामने आई प्रारंभिक जांच में 66 लाख 45 हजार 622 रुपए की वित्तीय अनियमितता का उल्लेख किया गया था।

मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित करने के साथ गढ़ा थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी। जांच आगे बढ़ने पर कैश शाखा में पदस्थ कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे। उस दौरान कैश शाखा से जुड़े दो कर्मचारियों का दूसरे विभागों में तबादला किए जाने की जानकारी सामने आई थी। प्रकाशित रिपोर्ट में अरविंद धुर्वे और विशाल उसरेठे के नाम भी सामने आए थे।

कैश कलेक्शन से बैंक जमा तक खंगाला जा रहा रिकॉर्ड

SIT अब कैश शाखा से जुड़े कर्मचारियों से कैश कलेक्शन, रसीद बुक, टैली सॉफ्टवेयर में दर्ज रकम, बैंक में जमा राशि और इन सभी रिकॉर्ड के मिलान को लेकर पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि रिकॉर्ड और वास्तविक बैंक जमा राशि के बीच अंतर किस स्तर पर और किस अवधि में पैदा हुआ।

फिलहाल तीन कर्मचारियों को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है। उनकी औपचारिक गिरफ्तारी, लगाई जाने वाली धाराएं, पुलिस रिमांड और संभावित रिकवरी की स्थिति पुलिस की आधिकारिक जानकारी के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

वर्षों तक कैसे चलता रहा अंतर?

मामले का सबसे अहम सवाल यही है कि मरीजों से वर्षों तक राशि वसूल किए जाने के बावजूद बैंक मिलान, लेखा परीक्षण और विभागीय निगरानी के दौरान इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितता समय रहते पकड़ में क्यों नहीं आई। जांच एजेंसी अब इसी कड़ी को जोड़ने में जुटी है।

SIT की पूछताछ और दस्तावेजों की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कथित वित्तीय अंतर किस स्तर पर हुआ और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।

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