रोहित आर्य एवं अन्य की ओर से दायर याचिका डब्ल्यूपी क्रमांक 34169/2026 पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने यह आदेश जारी किया। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सुनील कुमार पांडे ने पैरवी की।
नियुक्ति की शर्त को दी गई थी चुनौती
याचिकाकर्ताओं ने नियुक्ति आदेश में शामिल उस शर्त को चुनौती दी थी, जिसके तहत सेवा के पहले तीन वर्षों में न्यूनतम वेतनमान का क्रमशः 70 प्रतिशत, 80 प्रतिशत और 90 प्रतिशत वेतन दिए जाने का प्रावधान था। याचिकाकर्ताओं ने 7 अक्टूबर 2021 और 21 दिसंबर 2022 से नियमितीकरण तक की अवधि का पूरा वेतन, सभी परिणामी लाभ और ब्याज दिए जाने की मांग की थी।
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि इसी तरह के मामले में हाईकोर्ट की इंदौर बेंच पहले ही पूरा न्यूनतम वेतन देने का फैसला सुना चुकी है। इसके लिए डब्ल्यूपी क्रमांक 2977/2025, इंदौर नगर निगम बनाम विनीता तिवारी व अन्य के फैसले का हवाला दिया गया।
6 प्रतिशत ब्याज के साथ बकाया राशि देने के निर्देश
कोर्ट ने प्रस्तुत कानूनी आधार को स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ताओं को प्रोबेशन अवधि के दौरान न्यूनतम वेतनमान देने का निर्देश दिया। साथ ही बकाया वेतन की राशि का भुगतान 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ करने को कहा गया। आदेश के साथ ही रिट याचिका का निराकरण कर दिया गया।
अन्य कर्मचारियों के लिए भी अहम माना जा रहा फैसला
हाईकोर्ट का यह फैसला उन कर्मचारियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिन्हें प्रोबेशन अवधि के दौरान न्यूनतम वेतनमान से कम वेतन दिया गया है। अधिवक्ता सुनील कुमार पाण्डेय की पैरवी से मिली इस राहत को कर्मचारियों के वेतन संबंधी अधिकारों की दिशा में अहम न्यायिक कदम माना जा रहा है।
