भोपाल। मध्य प्रदेश के सभी स्कूलों में इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जन्माष्टमी 4 सितंबर को है, लेकिन इसके पहले 1 से 3 सितंबर 2026 तक प्रदेशभर के स्कूलों में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, लीलाओं और शिक्षाओं पर आधारित विभिन्न कार्यक्रम होंगे।
लोक शिक्षण आयुक्त की ओर से सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत स्कूलों में कृष्ण लीला का मंचन, नाटक, नृत्य, व्याख्यान और विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, परंपराओं, नैतिक मूल्यों और आपसी भाईचारे से परिचित कराना है।
कृष्ण लीला और गीता ज्ञान पर होंगे कार्यक्रम
स्कूलों में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े प्रसंगों और श्रीमद्भगवद्गीता की शिक्षाओं पर आधारित नाटक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। विद्यार्थियों को श्रीकृष्ण के जीवन और उनके संदेशों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही श्रीकृष्ण से जुड़े भ्रामक मिथकों और गलत धारणाओं को दूर करने के लिए व्याख्यान भी आयोजित किए जाएंगे।
सांदीपनि विद्यालयों में गुरु-शिष्य परंपरा पर जोर
निर्देशों के अनुसार सांदीपनि विद्यालयों में विशेष कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं होंगी। इनमें भगवान श्रीकृष्ण और उनके गुरु सांदीपनि से जुड़े प्रसंगों को केंद्र में रखा जाएगा। गुरु-शिष्य परंपरा पर चर्चा के साथ विद्यार्थियों द्वारा नाटक और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर तैयार हुई योजना
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विभिन्न बैठकों में बच्चों और युवाओं को भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, लीलाओं और शिक्षाओं से परिचित कराने के निर्देश दिए थे। इसी के तहत ‘श्रीकृष्ण पाथेय’ पर काम किया जा रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग को स्कूलों के माध्यम से विद्यार्थियों तक श्रीमद्भगवद्गीता, श्रीकृष्ण की शिक्षाओं और उनके जीवन से जुड़े प्रसंग पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है।
स्कूलों में धार्मिक आयोजन को लेकर उठे सवाल
स्कूलों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कार्यक्रम आयोजित किए जाने को लेकर आपत्ति भी सामने आई है। मुस्लिम स्कॉलर तौकीर निजामी ने कहा कि स्कूलों को किसी एक धर्म विशेष के आयोजन के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं तो सभी धर्मों के त्योहारों को समान रूप से शामिल किया जाना चाहिए।
हिंदू धर्मगुरु ने फैसले का किया समर्थन
वहीं हिंदू धर्मगुरु महंत अनिलानंद ने सरकार के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को हिंदू देवी-देवताओं और भारतीय संस्कृति के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए। भाजपा प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने भी फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन आदर्श है और इसी वजह से स्कूलों में जन्माष्टमी से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
इस तरह MP के स्कूलों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आयोजन सरकार की सांस्कृतिक पहल के रूप में सामने आया है, लेकिन इसे लेकर अलग-अलग मत भी सामने आ रहे हैं।
